Saturday, November 19, 2011
Tuesday, October 25, 2011
Thursday, October 6, 2011
चलो भरते हैं उड़ान
नभ की ओर .....
खोजते हैं इसका
ओर छोर .
समेट के सारा
अपना बल ..
तलाशते हैं चलो
सुनहरा कल
भूल विगत क़ी
सारी हार ..
करे नयी जीत
का आगाज ..
कैसा डर अनहोनी से
लेंगे लोहा हर होनी से
खुद करेंगे तय
मंजिल अपनी
पाएंगे खोयी
सी पहचान
है माना वक़्त
बहुत कम है
पर अशक्त नहीं
बाजु रखती दम है
है कहाँ कोई
जो रोके हमको
बुलंदी पे जाने
से टोके हमको
हम करेंगे करते
आये हैं ,,,,,,,,बस
मन मे लेते हैं जो ठान 



Saturday, August 20, 2011
मुझे क्या लेना समन्दरों के पानी से
जब आंसूं मेरे सैलाब हो गए ,,
क्या मांगूं हिसाब उस खुदा से
जब जुर्म बेहिसाब हो गए
क्या पूछूँ सवाल मैं उनसे
जब कटघरे में सारे जवाब हो गए
और चले थे आजमाने खुद को ज़माने में
बिगड़ा नसीब ऐसा की हम खराब हो गए
Wednesday, June 1, 2011
Wednesday, February 23, 2011
चकर्व्युह है धरम का
तोड़ सके तो तोड़
बिखरे से समाज को इंसानियत से जोड़
सदियों से पीड़ित शोषित जो
बैठे है अंधेरों में ,शांत सी लहरों से मन को
इन्कलाब क़ि और मोड़
बहुत हुआ जुल्म सितम
चुप्पी क़ि कड़ियाँ तोड़ के
आक्रोश क़ि कड़ियाँ जोड़
मुठियों को भींच ले ,और इरादों को बुलंद कर
अधिकारों क़ि जंग है ,दौड़ सके तो दौड़
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